
मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक बनी दुर्दशा की मिसाल, डॉक्टर गायब और सफाईकर्मी के भरोसे मरीज
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देवास। लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक योजना के तहत संचालित मेंडकी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में व्यवस्थाओं की स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्लीनिक में दोपहर के समय डॉक्टर, नर्स और फार्मासिस्ट कोई मौजूद नहीं मिला। मौके पर केवल सफाई कर्मचारी मौजूद थीं। प्रतिनिधि ने
क्लीनिक पहुंचने पर सफाई कर्मचारी ने बताया कि उनका काम केवल साफ-सफाई का है और डॉक्टर दोपहर 2 बजे तक आएंगे। वहीं डॉक्टर की टेबल पर डॉ. कपिल धाकड़ की नेम प्लेट और खुली फाइलें रखी थीं, लेकिन डॉक्टर मौके पर नहीं थे। वेटिंग एरिया में करीब 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला और दो बच्चियां डॉक्टर के इंतजार में बैठी मिलीं। ऐसे में सवाल उठता है कि इस दौरान कोई गंभीर मरीज पहुंचता तो उसे तत्काल उपचार कौन देता?
मामले में डॉ. कपिल धाकड़ से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वे दवाई-गोली लेने अस्पताल गए थे। उनका कहना था कि दवाइयां नहीं लाएंगे तो मरीजों को क्या देंगे। वहीं CMHO के मीडिया अधिकारी कमल डाबर से बात करने पर उन्होंने डॉक्टर के ट्रेनिंग में होने की बात कही और फोन काट दिया। दोनों जवाबों में अंतर होने से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक का उद्देश्य मरीजों को समय पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना है। ऐसे में OPD समय में चिकित्सकीय स्टाफ की गैरमौजूदगी मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। लाखों रुपये की लागत से तैयार भवन, एसी और दवाइयों की व्यवस्था के बावजूद यदि मरीजों को डॉक्टर का इंतजार करना पड़े तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग देवास को मामले की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित समय में डॉक्टर और अन्य स्टाफ कहां थे तथा मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं थी। साथ ही क्लीनिकों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि बुजुर्गों, बच्चों और गरीब मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार न करना पड़े।



