मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस का बड़ा आंदोलन : पटवारी

दो साल से राहुल गांधी उठा रहे हैं लोकतंत्र और ‘वोट चोरी’ का सवाल, अब मध्यप्रदेश में मतदाता सूची और चुनाव व्यवस्था को लेकर कांग्रेस करेगी निर्णायक आंदोलन : जीतू पटवारी
सोमवार को भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय का घेराव, मंगलवार को पूरे प्रदेश में जिला कलेक्टर कार्यालयों का घेराव
भोपाल, 24 सितंबर 2026।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी ने आज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।
इस अवसर पर मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक एवं संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे जी उपस्थित रहे।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि पिछले करीब दो वर्षों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार देश में लोकतंत्र, मतदाता के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने बार-बार कहा है कि यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी होती है अथवा किसी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है, तो इसका सीधा प्रभाव उसके संवैधानिक मताधिकार पर पड़ता है।
पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी आज दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों एवं सवालों को देश के सामने रखेंगे। कांग्रेस का कहना है कि यह केवल किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक मतदाता के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न है
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 के तहत मतदाता सूची, नाम खोजने और संबंधित प्रक्रियाओं की सुविधा उपलब्ध है। पटवारी ने कहा कि SIR के प्रारंभिक चरण में मध्यप्रदेश की मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की बात सामने आई। कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया में यह सवाल उठाया कि कितने मतदाताओं के नाम किन कारणों से हटाए गए, कितने मतदाता स्थानांतरित हुए, कितने मतदाताओं की मृत्यु हुई और कितने नाम डुप्लीकेट पाए गए।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार दिसंबर 2025 में प्रकाशित ड्राफ्ट प्रक्रिया में 42,74,160 नामों से संबंधित जानकारी/फॉर्म उपलब्ध न होने की बात सामने आई थी। इसके बाद दावे-आपत्तियों और सत्यापन की प्रक्रिया हुई। फरवरी 2026 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में मध्यप्रदेश में कुल 5,39,81,065 मतदाता दर्ज किए गए और रिपोर्टेड आंकड़ों के अनुसार 34,25,078 नाम हटाए गए, जबकि ड्राफ्ट सूची की तुलना में लगभग 8.49 लाख मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि दर्ज हुई।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस का सवाल है कि ड्राफ्ट और अंतिम सूची के बीच हुए इतने बड़े बदलावों का विधानसभा क्षेत्रवार और बूथवार पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए। प्रत्येक मतदाता को यह जानने का अधिकार है कि उसका नाम सूची में है या नहीं और यदि हटाया गया है तो उसका कारण क्या है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग स्वयं मतदाता सूची की तैयारी, संशोधन और सुधार की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाली संस्था है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट भी उसे चुनाव प्रक्रिया संचालित करने वाली स्वायत्त संवैधानिक संस्था के रूप में वर्णित करती है।
पटवारी ने कहा कि नए मतदाता के पंजीयन के लिए Form-6 महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर Form-6 के माध्यम से नए मतदाता के पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है। वहीं नाम हटाने के लिए Form-7 की व्यवस्था भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि चुनाव संबंधी किसी फॉर्म या प्रक्रिया में बदलाव किया गया है तो उसकी पूरी जानकारी, कानूनी आधार और प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। कांग्रेस यह जानना चाहती है कि संसद और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप सभी परिवर्तन हुए हैं या नहीं।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग को सरकार या सत्तारूढ़ दल के प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र रहकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है। यदि मतदाता को ही चुनाव प्रक्रिया पर संदेह होने लगे तो लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास कमजोर होता है।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सभी सवालों का पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाए और जहां किसी अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठते हैं, वहां स्वतंत्र जांच की व्यवस्था हो।
पटवारी ने घोषणा की कि सोमवार को मध्यप्रदेश कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ता भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग की इकाई का घेराव करेंगे।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें होंगी
1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से इस्तीफे की मांग।
2. चुनाव प्रक्रिया एवं मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच।
3. यदि जांच में आपराधिक कृत्य प्रमाणित हों तो FIR दर्ज की जाए।
4. दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
5. मतदाता सूची में हटाए गए प्रत्येक वास्तविक मतदाता को अपना पक्ष रखने और नाम पुनः जुड़वाने का अवसर मिले।
6. चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए।
पटवारी ने कहा कि इसके अगले दिन मंगलवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जिला कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाएगा।
पटवारी ने कहा कि आगामी तीन दिनों में कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में मतदाता सूची, चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह केवल मध्यप्रदेश का मुद्दा नहीं है। बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों में भी SIR तथा मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक दलों और नागरिकों द्वारा सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस इन सभी मुद्दों को लोकतांत्रिक अधिकारों के संदर्भ में उठाएगी।
पटवारी ने कहा कि वर्ष 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून में बदलाव किया गया और चयन समिति की संरचना में भारत के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को हटाकर केंद्रीय गृह मंत्री को शामिल किया गया।
उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री एक ही राजनीतिक दल से आते हैं और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सरकार की भूमिका बढ़ती है, तो विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी हो जिसमें किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव की आशंका न्यूनतम हो और जनता का विश्वास अधिकतम हो।
पटवारी ने कहा कि चुनाव में इस्तेमाल होने वाली EVM, VVPAT और मतदाता सूची से जुड़े सवालों का जवाब संस्थागत और तकनीकी स्तर पर पारदर्शिता के साथ दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल सवाल उठाना नहीं है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में आम मतदाता का विश्वास बनाए रखना भी है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता को यह पता ही न हो कि उसका नाम मतदाता सूची में है या नहीं, तो उसके मताधिकार की रक्षा कैसे होगी इस सवाल का स्पष्ट जवाब निर्वाचन व्यवस्था को देना चाहिए।
आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग
पटवारी ने आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को बैलेट पेपर से कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार और निर्वाचन संस्थाओं को चुनाव प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बनाए रखना है तो स्थानीय चुनावों में बैलेट पेपर के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस मतपत्र, मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाती रहेगी।
पटवारी ने कहा कि जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे किसी राजनीतिक दबाव में काम न करें।
उन्होंने कहा कि चुनाव से संबंधित प्रक्रिया में यदि किसी अधिकारी द्वारा पक्षपात किया जाता है या किसी राजनीतिक दल को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जाता है तो कांग्रेस कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध करेगी।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को संविधान और कानून के अनुसार निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति मतदाता के पास होती है। इसलिए किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटना गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग, सरकार और प्रशासन से जवाब मांगती रहेगी कि
किस मतदाता का नाम हटाया गया?
किस आधार पर हटाया गया?
किस अधिकारी ने सत्यापन किया?
मतदाता को सूचना कब दी गई?
दावे और आपत्ति का अवसर कैसे दिया गया?
कितने नाम वापस जोड़े गए?
कितने नाम अभी भी विवादित हैं?
विधानसभा और बूथवार पूरा डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
जनता के सवालों का जवाब देना होगा
जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश कांग्रेस आने वाले दिनों में गांव-गांव और बूथ-बूथ जाकर मतदाता सूची की स्थिति की जानकारी लेगी। कांग्रेस कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में मौजूद रहें और जिन मतदाताओं को किसी कारण से परेशानी हुई है, उन्हें नियमानुसार शिकायत और अपील का अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता, मतदाता के अधिकार, स्वतंत्र पत्रकारिता और संविधान में दिए गए नागरिक अधिकारों के लिए है।
पटवारी ने कहा कि सोमवार 28 सितंबर 2026 राज्य निर्वाचन आयोग घेराव और मंगलवार 29 सितंबर 2026 को जिला कलेक्टर कार्यालयों का घेराव इसी अभियान की अगली कड़ी होगा। आने वाले दिनों में कांग्रेस कार्यसमिति के निर्णय के बाद इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया जाएगा।



