लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के संबंध में प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन

देवास महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के संबंध में प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास साबिर अहमद सिद्दीकी ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुये अधिनियम के महत्व को बताया। उन्होंने बताया कि लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 एक महत्वपूर्ण कानून है जो बालकों के अधिकारों की रक्षा करने में मदद करता है। हमें इस कानून के प्रावधानों को समझना और इसका पालन करना चाहिए ताकि हम बालकों को सुरक्षित और स्वस्थ माहौल प्रदान कर सकें।
मास्टर ट्रेनर अर्चना सहाय ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 पर विस्तृत चर्चा की एवं पीपीटी के माध्यम से उपस्थित जनों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में बालकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कई कानून बनाए गए हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण कानून है लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012, यह कानून बालकों को लैंगिक शोषण और उत्पीड़न से बचाने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को बालक माना जाता है। कानून के तहत बालकों के साथ किए जाने वाले लैंगिक अपराधों को परिभाषित किया गया है, जिनमें बालकों के साथ यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी शामिल हैं। कानून के तहत लैंगिक अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है, जिसमें उम्रकैद से लेकर मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है कानून के तहत पीड़ित बालक के अधिकारों की रक्षा का प्रावधान है, जिसमें उसे न्याय और मुआवजा दिलाने का अधिकार शामिल है।
बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 कानून बालकों को लैंगिक शोषण और उत्पीड़न से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कानून बालकों के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान करने में मदद करता है। कार्यशाला का संचालन डॉ. एकता जायसवाल ने किया। कार्यशाला में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास साबीर अहमद सिद्दीकी, डीएसपी बबिता बामनिया, सहायक संचालक लवनीत कोरी, वन स्टॉप सेंटर प्रशासक गीता ठाकुर, मास्टर ट्रेनर अर्चना सहाय, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष/सदस्य, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य, पुलिस थानों से बाल कल्याण अधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे।




