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देवास में खनिज संपदा की लूट का आरोप, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल
देवास। जिले में खनिज संपदा के कथित अवैध दोहन को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का खेल बड़े स्तर पर चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी आखिर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं यह सवाल लगातार उठ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों को अवैध गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही हैं, या शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही?
जब मीडिया द्वारा अधिकारियों से पूछा जाता है कि आखिर यह सब कैसे हो रहा है, तो कई बार मामले को टालने या “यह सब रहने दो” जैसे जवाब सामने आने की बात कही जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर मामला रहने क्यों दिया जाए?
यह सिर्फ खनिज संपदा के दोहन का मामला नहीं है। यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो इससे सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो जनता के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कार्रवाई में देरी की वजह क्या है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की? कितने प्रकरण सामने आए? कितनी कार्रवाई हुई? कितना जुर्माना वसूला गया? और सरकारी राजस्व को कितना नुकसान हुआ?
अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक हो रहा है, तो संबंधित विभाग को तथ्यों और दस्तावेजों के साथ सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही इसका जवाब भी जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
खनिज संपदा किसी व्यक्ति, अधिकारी या ठेकेदार की निजी संपत्ति नहीं है। यह प्रदेश और जनता की प्राकृतिक संपदा है। इसकी सुरक्षा, नियमों के अनुसार दोहन और सरकारी राजस्व की रक्षा करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
अब देखना यह है कि इन गंभीर सवालों पर प्रशासन और खनिज विभाग क्या जवाब देता है और क्या वास्तव में जांच के बाद कार्रवाई होती है?
सवाल सीधे हैं जवाब भी सीधे चाहिए।




