
भोपाल में सीलिंग का संकट सरकार की 21 साल की नीतिगत विफलता का परिणाम: मुकेश नायक
व्यापारी और रहवासी दोनों परेशान, सरकार बताए—21 साल तक मास्टर प्लान क्यों नहीं बनाया और अब अचानक सीलिंग क्यों
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया अध्यक्ष मुकेश नायक जी ने भोपाल में जारी सीलिंग की कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल में आज व्यापारी और आम रहवासी जिस संकट का सामना कर रहे हैं, वह अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि पिछले 21 वर्षों से मास्टर प्लान लागू न किए जाने और सरकार की स्पष्ट शहरी एवं आवासीय नीति के अभाव का परिणाम है।
नायक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भोपाल के विभिन्न रिहायशी क्षेत्रों में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। भोपाल के कई क्षेत्रों में व्यापारियों के कारोबार प्रभावित हुए हैं। वर्षों से दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले लोगों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा कि किसी दुकान पर ताला लगाना केवल एक प्रतिष्ठान को बंद करना नहीं है, बल्कि उससे जुड़े व्यापारी, कर्मचारी, परिवार और छोटे कारोबारियों की पूरी आजीविका प्रभावित होती है। सरकार को यह बताना चाहिए कि जिन लोगों ने वर्षों तक कारोबार किया, वे अचानक अपराधी कैसे हो गए?
नायक ने कहा कि दूसरी ओर रहवासी भी पार्किंग, ट्रैफिक, शोर, जल निकासी और सुरक्षा जैसी समस्याओं से परेशान हैं। सरकार की अस्पष्ट नीति ने व्यापारी और रहवासी दोनों को परेशानी में डाल दिया है।
उन्होंने भाजपा सरकार से सवाल करते हुए कहा
सरकार से कांग्रेस के 10 सीधे सवाल
1. जब भोपाल का मास्टर प्लान पिछले 21 वर्षों से लंबित है, तो इतने वर्षों तक सरकारों ने इसे लागू क्यों नहीं किया?
2. जब सरकार को पता था कि भोपाल तेजी से फैल रहा है और रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, तो भविष्य की जरूरतों के अनुसार व्यावसायिक क्षेत्र विकसित क्यों नहीं किए गए?
3. यदि आवासीय और व्यावसायिक उपयोग को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट थी, तो वर्षों तक इन इलाकों में कारोबार कैसे चलता रहा?
4. जिन व्यापारियों ने वर्षों तक अपनी दुकानें चलाकर परिवार पाले, उनके सामने अचानक रोजी-रोटी का संकट खड़ा करने से पहले सरकार ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की?
5. क्या सरकार की जिम्मेदारी केवल दुकानें सील करना है, या वर्षों से चली आ रही इस नीतिगत समस्या का स्थायी समाधान निकालना भी है?
6. 60 फीट और 80 फीट जैसी प्रमुख सड़कों पर लंबे समय से चल रहे कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए सरकार की स्पष्ट नीति क्या है?
7. व्यापारियों की मांगों—जैसे 60 फीट सड़कों को अर्ध-व्यावसायिक और 80 फीट सड़कों को व्यावसायिक उपयोग के लिए निर्धारित करने—पर सरकार का क्या रुख है?
8. सीलिंग के कारण जिन दुकानदारों, कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों की आय बंद हो गई है, उनकी आर्थिक क्षति और रोजगार की जिम्मेदारी कौन लेगा?
9. यदि मास्टर प्लान अब भी सरकार के लिए प्राथमिकता है, तो उसे लागू करने में पिछले 21 वर्षों की देरी के लिए जिम्मेदार कौन है?
10. सरकार भोपाल के नागरिकों को स्पष्ट करे क्या उसका उद्देश्य शहर की समस्या का समाधान करना है या बिना वैकल्पिक व्यवस्था के सिर्फ सीलिंग की कार्रवाई करके अपनी जिम्मेदारी से बचना है?
नायक ने कहा कि भोपाल के व्यापारी अपराधी नहीं हैं। वर्षों से चल रहे कारोबार को केवल प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से खत्म करने के बजाय सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिसमें कानून का पालन भी हो और लोगों की आजीविका भी सुरक्षित रहे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी व्यापारी वर्ग और आम रहवासियों दोनों के साथ खड़ी है। कांग्रेस की मांग है कि सरकार तत्काल सीलिंग से प्रभावित व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करे, वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करे और भोपाल के लिए स्पष्ट, जनहितैषी एवं व्यावहारिक मास्टर प्लान जल्द लागू करे।
नायक ने सरकार से पूछा कि भोपाल को सीलिंग और अव्यवस्था का शहर बनाना है या ऐसा आधुनिक और जनहितैषी शहर बनाना है, जिसमें व्यापारी भी सुरक्षित हों और रहवासी भी




