अवैध लकड़ी का काला कारोबार जारी: वन विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में

पीपलरांवा-सोनकच्छ में अवैध लकड़ी का काला कारोबार जारी: वन विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में
नाकेदार से लेकर डिप्टी रेंजर तक कथित मिलीभगत, रात के अंधेरे में लकड़ी की तस्करी का सिलसिला
देवास। जिले के पीपलरांवा, टोंकखुर्द और सोनकच्छ क्षेत्र में अवैध लकड़ी का काला कारोबार अब सार्वजनिक चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि रात के अंधेरे में हरे-भरे वृक्ष काटकर आरा मशीनों के माध्यम से लकड़ी तैयार की जाती है और फिर आयशर वाहन में भरकर इंदौर समेत अन्य शहरों में भेजा जाता है।
गत रात्रि को भी एक आयशर वाहन क्रमांक MP09 GF 0975 अवैध लकड़ी भरकर पीपलरांवा से निकला। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी, लेकिन वाहन को रोकने के बजाय कथित तौर पर माफियाओं को पहले ही सूचना दे दी गई। सूत्रों के अनुसार, यह वाहन रोजाना रात के समय इंदौर की ओर रवाना होता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और इसमें वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी शामिल है। नाकेदार से लेकर डिप्टी रेंजर तक कुछ अधिकारी इस अवैध कारोबार को संरक्षण दे रहे है और प्रति गाड़ी कथित रूप से वसूली की जा रही है।
ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने मामले पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है और औपचारिक जांच की जा रही है।
अब यह देखने वाली बात है कि वन विभाग इस अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा या इसे फिर से लिपापोती कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।




