
देवास के उज्जैन रोड पर सड़क निर्माण के नाम पर हरे-भरे पेड़ों की कटाई को लेकर एल्डरमैंन ने लगाय आरोप
देवास मामले का खुलासा तब हुआ जब नगर निगम देवास के एल्डरमैन संतोष वर्मा मौके पर पहुंचे। उनका आरोप है कि उज्जैन रोड पर लगभग 8 से 9 छायादार हरे पेड़ बिना किसी परमिशन के काट दिए गए। संतोष वर्मा ने बताया कि उन्होंने खुद PWD अधिकारी निशांत जी से बात की, तो उन्होंने साफ कहा कि विभाग ने इस पेड़ कटाई की कोई परमिशन ही नहीं दी है। वर्मा जी का सबसे बड़ा आरोप ये है कि काटी गई लकड़ी नगर निगम के सीमा में आती है जो लकड़ी श्मशान घाट में जानी चाहिए थी, लेकिन वो वहां नहीं पहुंची। ठेकेदार के लोगों ने लकड़ी को किसी और को भेज दि हे उन्हें बायपास पर लकड़ी दिखाने की बात कह कर गुमराह किया जा रहा। है जब वर्मा द्वारा ठेकेदार के इंजीनियर यादव को वहां पर बुलाया गया तो उनका कहना है कि हमने 12से 13 पेड़ काटे हैं जो की परमिशन से ही काटे हैं बिना परमिशन कोई पेड़ नहीं काटे और जिसकी लकड़ी हमारे पास स्टॉक पर रखी हुई है जब मौके पर जाकर देखा तो वहां कोई लकड़ी नहीं थी अब इस पूरे मामले पर ठेकेदार मनीष अग्रवाल जी का पक्ष भी सामने आया है। ठेकेदार मनीष अग्रवाल का कहना है कि खुदाई के कारण 3-4 पेड़ एक साइड में लटक गए थे, इसलिए उन्हें हटाना पड़ा। हमपर लगाए गए आरोप गलत है वहीं जब उनसे लकड़ी गायब होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा ये मेरे ध्यान में नहीं है, मैं अपने लड़कों से पूछ कर बताऊंगा। अब सवाल यह उड़ता हैं की अगर खुदाई के कारण सिर्फ 3-4 पेड़ लटके थे तो बाकी के 4-5 पेड़ किस आधार पर काटे गए और अगर PWD के पास परमिशन ही नहीं है तो ये कटाई किसके आदेश पर हुई? और सबसे बड़ा सवाल – लाखों की लकड़ी आखिर गई कहाँ और इस पर विभाग क्या कार्रवाई करेगा



