लघु, सीमांत और बड़े किसानों के लिए बनेगा ‘एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल’, 10 दिनों विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश

लघु, सीमांत और बड़े किसानों के लिए बनेगा ‘एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल’, 10 दिनों विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देशकृषि को आधुनिक बनाने, लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए हुआ विस्तृत विचार-विमर्शनरवाई प्रबंधन, माइक्रो इरिगेशन और ई-मंडी में रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा देने पर ज़ोरकलेक्टर ऋतुराज की अध्यक्षता में जिला कृषि रोड मैप की समीक्षा बैठक संपन्नदेवास,कलेक्टर ऋतुराज की अध्यक्षता में जिले के कृषि रोड मेप के संबंध में कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के कृषि परिदृश्य को आधुनिक बनाने, लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि, उद्यानिकी व संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।कलेक्टर सिंह ने बैठक में स्पष्ट किया कि जिले के विकास के लिए एक व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी रणनीति की आवश्यकता है।

उन्होंने सभी संबंधित विभागों को पूरे जिले के लिए एक फसल आधारित ‘एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल’ तैयार करने को कहा, जिसमें लघु, सीमांत और बड़ी जोत वाले सभी किसानों को शामिल किया जा सके। उन्होंने इस मॉडल की विस्तृत कार्ययोजना आगामी 10 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।कलेक्टर सिंह ने कहा कि किसानों को जायद सीजन में मूंग की फसल के स्थान पर उड़द की फसल लेने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को एक ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिले में उपलब्ध कृषि इनपुट और मिट्टी के प्रकार के अनुसार ही कृषि, उद्यानिकी और सब्जी वाली फसलों का चयन किया जाएगा, ताकि पैदावार बेहतर हो सके। खेतों में नरवाई (पराली) प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें, इसके लिए किसानों को जागरूक कर नरवाई जलाने से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी दें। सिंचाई जल के अपव्यय को रोकने और उसके न्यायोचित उपयोग के लिए माइक्रो इरिगेशन तकनीकों जैसे ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाए।कलेक्टर सिंह ने कहा कि स्थानीय स्तर पर सब्जी, फल और विशेष रूप से चिया सीड की मार्केटिंग व प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना की जाए। कृषि यंत्रों के लिए ‘जे फार्म के माध्यम से कस्टम हायरिंग सेंटर्स को बढ़ावा दिया जाए। स्थानीय कृषि उपज मंडियों में उत्पादों की खरीदी बढ़ाने के साथ-साथ ‘ई-मंडी’ प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन तेज किया जाएगा, ताकि किसान सीधे और पारदर्शी तरीके से अपनी उपज, सब्जी तथा फलों की खरीदी-बिक्री कर सकें। कलेक्टर सिंह ने सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम कर 10 दिन में योजना बनाकर कर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहां, ताकि कृषि रोड मैप को जिले में जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जा सके।बैठक में जिले के लिए अनुकूल संसाधन प्रभावी एवं लाभकारी कृषि की दिशा में प्रदेश के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा कृषि कार्य योजना का प्रेजेण्टेशन दिया गया। उप संचालक कृषि ज्ञानसिंह मोहनिया ने जिले के संपूर्ण कृषि के परिदृश्य एवं विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उप संचालक उद्यानिकी राजू बडवाया ने जिले में फल-सब्जी एवं प्रसंस्करण के संबंध में जानकारी दी। उप संचालक पशुपालन ने आचार्य विद्या सागर गो संवर्धन योजना, बकरी इकाई योजना, टीकाकरण, पशु उपचार एवं बांझपन के निवारण के शिविरों की जानकारी दी। सहायक संचालक मत्स्य विभाग द्वारा जिले में मत्स्य बीज उत्पादन, मत्स्य बीज संचयन, मस्त्योत्पादन, किसान क्रेडिट कार्ड एवं स्मार्ट फिश पार्लर के संबंध में जानकारी दी। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक द्वारा जिले में अल्पावधि कृषि ऋण वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड एवं पट्टाधारी केसीसी धारक आदि की विस्तृत जानकारी दी।बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सोयाबीन के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.बी.यू. दुपारे ने सोयाबीन के साथ अंतरवर्तीय फसलें एवं गेहूं कटाई के पश्चात सोयाबीन बुआई के लिए नरवाई प्रबंधन के संबंध में भी जानकारी दी। खरपतवार अनुसंधान निदेशालय से पधारे डॉ.विजयकुमार चौधरी एवं डॉ.पी.के.सिंह ने खरपतवार नियंत्रण के प्रभावी उपायों एवं फसलों में उपयोग होने वाले विभिन्न कीटनाशियों व खरपतवारनाशी की अनुशंसित मात्रा के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही बताया कि मेडों पर सुरजना फली एवं मेहंदी लगाएं, जिससे किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिल सके। निदेशक अटारी जबलपुर आईएआर के डॉ.एस.आर.के.सिंह ने जिले में कृषि रोड मेप की शॉर्टटर्म एवं लॉगटर्म कृषि आधारित कार्ययोजना के बारे में बताया।




