अशुद्ध मति मंथरा का संगत जहां है वहा शुद्ध मति के विचार भी अशुद्ध हो जाता है-

अशुद्ध मति मंथरा का संगत जहां है वहा शुद्ध मति के विचार भी अशुद्ध हो जाता है- पंडित सुनील कृष्ण व्यास देवास। जिव्हा दांतों के बीच रह कर भी भोजन ग्रहण कर सकती है भक्त वो है जो दुष्टों के बीच रहकर भी भजन कर सकता है। रावण राम का विरोधी था किंतु विभीषण राम के भक्त थे । जब रावण ने राम के नाम को लेने का विरोध किया विभीषण ने रावण से कहा मैं अपने भाई और भाभी का नाम लेता हूं रावण का रा और मन्दोदरी का म। प्रभु के नाम का प्रताप था कि दुष्ट रावण का भाई भी लंका में राम का भक्त बना रहा।
राम कथा परिवार के संबंधों प्रगाढ़ करता है
आज हम बेटों का राम बनाना चाहते है हमे जनक बनना होगा तभी घर अयोध्या बनेगा। राम भगवान है तो संत भरत है भगवान भक्त को सोता छोड़ कर जा सकते है किन्तु भरत जैसे संत भक्तों को भगवान से मिला सकता है जिसने भरत जी चरित्र को आत्मसात कर लिया उसे भगवान की भक्ति स्वत प्राप्त हो सकती है। गंगा से पार जाने के लिए जब राम ने केवट को बुलाया ये केवट की भक्ति का प्रताप था कि भवसागर से पार उतारने वाला ईश्वर स्वयं को नदी को पार करने के लिए भक्त का आश्रय लेता है। राम ने वन के आदिवासी निषाद राज को गले लगा कर गले लगा कर बताया कि ईश्वर जाती को नहीं मानते वो भक्ति के भाव को सर्वाेपरि मानते है। कथा में भरत जी के चरित्र, केवट चरित्र की कथा का वर्णन इतना मार्मिक था प्रत्येक श्रोताओं को आंखों से अश्रु धारा बहने लगी ।
राम को भरत से अधिक चाहने वाली कैकई को भी मंथरा की संगति ने अयोध्या के परम सुख को दुख में बदल दिया। जिस घर में मंथरा है वो घर कभी घर नहीं रह सकता है। अशुद्ध मति के संगत से शुद्ध मति भी अशुद्ध हो जाती है। यह विचार स्वर्णकार धर्मशाला में स्वर्णकार समाज महिला मंडल द्वारा आयोजित राम कथा के छटे दिन रामायणाचार्य पंडित सुनील कृष्ण व्यास ने व्यक्त कर श्रोतों को भाव विभोर कर दिया। राम कथा के प्रत्येक प्रसंग के आध्यात्मिक रहस्य का वर्णन कर श्रोताओं मंत्र मुग्ध कर दिया। कथा में पूर्व महापौर जयसिंह ठाकुर ने व्यास पीठ से गुरुजी का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर गुर्जर ब्राह्मण नगर सभा के एडवाकेट एम एम मोदी, नवीन दुबे, चेतन उपाध्याय, संजय शर्मा ,हेमंत शर्मा, डॉ संजय तिवारी ,अमित पंडित ने गुरुजी का सम्मान कर अध्यात्म गौरव सम्मान पत्र भेंट कर समान किया। भारत विकास परिषद के डसानीय एवं हेमंत वर्मा ने परिषद की ओर से सम्मान किया। कथा स्वर्णकार समाज की महिला मंडल ने गुरूजी का सम्मान किया। कथा में देवास सहित उज्जैन, इंदौर के भक्तों ने बड़ी संख्या में आकर कथा का श्रवण किया। कथा के अंत में मुकेश वर्मा एवं परिवार की ओर से महाप्रसादी का आयोजन किया।




