देवास

स्वरों में शास्त्र की गहराई, बंदिशों में ईश्वर की वंदना

स्वरों में शास्त्र की गहराई, बंदिशों में ईश्वर की वंदना
दो दिवसीय प्रतिष्ठित पंडित कुमार गंधर्व स्मृति संगीत समारोह का शुभारंभ, प्रथम दिवस गायन एवं पखावज जुगलबंदी की सभाएं
देवास अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन एवं नगर पालिका निगम  देवास एवं पंडित कुमार गंधर्व प्रतिष्ठान देवास के सहयोग से दो दिवसीय पंडित कुमार गंधर्व स्मृति संगीत समारोह का शुभारंभ शनिवार को हुआ। मल्हार स्मृति मंदिर देवास सभागार में आयोजित इस प्रतिष्ठापूर्ण समारोह के शुभारंभ अवसर पर सुविख्यात गायिका एवं पंडित कुमार गंधर्व की सुपुत्री कलापिनी कोमकली, सुविख्यात गायक एवं पंडित कुमार गंधर्व के सुपुत्र भुवनेश कोमकली विशेष रूप से उपस्थित रहे। साथ ही उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर, उप निदेशक शेखर करहाड़कर एवं जिला परियोजना अधिकारी स्मिता रावल भी उपस्थित रहीं। उपस्थित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कलाकारों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं संगीत रसिक उपस्थित थे। समारोह के पहले दिन शास्त्रीय गायन एवं पखावज जुगलबंदी की सभाएं सजीं।इस अवसर पर उस्‍ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर ने बताया कि पद्म विभूषण पण्डित कुमार गंधर्व मध्‍यप्रदेश का गौरव हैं। संगीत जगत में उनका अवदान अत्यंत सराहनीय है। उनकी स्‍मृति में अकादमी द्वारा इस समारोह का आयोजन आदरांजलि स्‍वरूप है। मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से युवा पीढ़ी को परिचित कराना भी आवश्यक उद्देश्य है। उप – निदेशक शेखर करहाड़कर ने बताया कि अकादमी की परम्‍परानुसार शास्‍त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ मूर्धन्‍य कलाकारों के अवदान एवं युवा कलाकारों को मंच प्रदान करने का प्रयास होता है।समारोह के पहले दिवस की प्रथम सभा में सानिया पाटणकर, पुणे का गायन हुआ। जयपुरअतरौली घराने की वरिष्ठ गायिका सानिया पाटणकर ने गायन के लिए अपने घराने की राग ललिता गौरी का चयन किया। इस मधुर एवं दुर्लभ राग के विस्तार का सिलसिला उन्होंने विलम्बित तीन ताल की बंदिश प्रीतम सैयाँ…. से किया। इसके बाद द्रुत की रचना एक ताल में देवी दुर्गे…. से शक्ति की महानता को अभिव्यक्त किया। अगली प्रस्तुति सरगम की रही। अंत में उन्होंने होरी गाई, जिसके बोल थे सकल ब्रज धूम…. थे। ब्रज के सौंदर्य के सुरीले बखान ने श्रोताओं के आनंद को उत्कर्ष तक पहुँचा दिया। उनके साथ तबले पर अंशुल प्रताप सिंह और हारमोनियम पर सुश्री मुन्नी मालवीय ने सधी संगत दी।अगली संगीत सभा में पखावज जुगलबंदी ने समां बांधा। मंच पर नमूदार हुई गया के पंडित वासुदेव उपाध्याय के 500 वर्ष पुराने घराने की 15वीं पीढ़ी ऋषि उपाध्याय एवं महिमा उपाध्याय, दिल्ली। उन्होंने अपने वादन का आरंभ चौताल में गणेश वंदना से किया। इसके बाद शिव स्तुति भी प्रस्तुत की। दिव्य वादन के बाद उन्होंने अपने घराने की 500 वर्ष से चली आ रही दुर्लभ रचनाओं का वादन कर श्रोताओं को बाँध दिया। परण, चक्करदार, रेला, चलन, जातिया इत्यादि भी बड़े ही अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया। अंत में दोनों ही साधकों के सवाल जवाब और रचनात्मक वादन ने इस प्रस्तुति को उत्कर्ष तक पहुंचाया। उनके साथ हारमोनियम पर श्री दीपक खसरावल ने साथ दिया।अंतिम सभा गायन के नाम रही। मंच पर थे गुणी गायक ओमकार दादरकर, कोलकाता। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का आरंभ राग जोग से किया। इस सुरीले और मधुर राग में विलंबित एक ताल की बंदिश पिहरवा को बिरमाय….थी। इसके बाद द्रुत तीन ताल की बंदिश साजन मोरे घर आये…. से वातावरण में प्रेम के रंग घोल दिये। वहीं, द्रुत एक ताल की बंदिश प्रथम मान ओमकार…. थी, जबकि उन्होंने प्रस्तुति का समापन भैरवी के साथ किया। उनके साथ तबले पर रामेंद्र सोलंकी, हारमोनियम पर दीपक खसरावल ने साथ दिया। ओमकार दादरकर के साथ उनके शिष्य प्रज्ज्वल शिरके एवं उत्सव श्रीवास्तव ने गायन एवं तानपुरा पर साथ दिया।
समारोह में दूसरे दिन
    पंडित कुमार गंधर्व स्मृति संगीत समारोह में 07 जून को सायं 7 बजे से तीन संगीत सभाएं होंगी। इनमें पहली सुश्री पूर्वी निमगांवकर, इन्‍दौर की गायन सभा सजेगी। इसके बाद अविनाश कुमार, दिल्‍ली द्वारा शास्‍त्रीय गायन की प्रस्‍तुति दी जाएगी। अंतिम प्रस्‍तुति पं. अतुल उपाध्‍याय एवं पं. विवेक सोनार की वायोलिन – बांसुरी जुगलबंदी का रसास्‍वादन श्रोता कर सकेंगे।

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