देवास

अमलतास अस्पताल में अमानवीयता: मरीज को रोका, सब्जी के ठेले को लिफ्ट में दी एंट्री”

“अमलतास अस्पताल में अमानवीयता: मरीज को रोका, सब्जी के ठेले को लिफ्ट में दी एंट्री”


अमलतास अस्पताल में मरीज तड़पता रहा, स्टाफ ने सब्जी का ठेला लिफ्ट में चढ़ाया

देवास। बड़े बड़े दावों और महंगे इलाज के लिए मशहूर अमलतास अस्पताल एक बार फिर अपने अमानवीय व्यवहार को लेकर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता की पोल खोल दी है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि अस्पताल का स्टाफ स्ट्रेचर पर लेटे मरीज को लिफ्ट में जाने से रोक रहा है और उसकी जगह सब्जी का ठेला लिफ्ट में चढ़ाया जा रहा है।वायरल वीडियो अमलतास अस्पताल की लिफ्ट का बताया जा रहा है। वीडियो में एक मरीज स्ट्रेचर पर लेटा हुआ है और उसके परिजन लिफ्ट में जाने की गुहार लगा रहे हैं। परिजन बार बार कह रहे हैं, “पहले हमें जाने दो, मरीज की हालत खराब है।” इसके बावजूद अस्पताल का स्टाफ उन्हें किनारे कर सब्जी से भरे ठेले को लिफ्ट में चढ़ाता दिख रहा है। मरीज के अटेंडर की बेबसी और स्टाफ का रवैया देखकर लोग अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठा रहे हैं। अमलतास अस्पताल खुद को गरीबों का मसीहा बताता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल पर मरीजों और परिजनों के साथ अभद्रता, छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। हर बार मामला उठता है, सोशल मीडिया पर हंगामा होता है, लेकिन अस्पताल मालिक के रसूखदार होने के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए बनी लिफ्ट का इस्तेमाल किचन या स्टोर के सामान के लिए करना कहां तक उचित है? क्या अस्पताल के कर्मचारियों को इमरजेंसी में मरीज की प्राथमिकता समझाने की ट्रेनिंग नहीं दी जाती? बार बार शिकायतों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन अमलतास अस्पताल पर सख्ती क्यों नहीं दिखाता? एक प्रत्यक्षदर्शी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम आधे घंटे से लिफ्ट के लिए इंतजार कर रहे थे। मरीज दर्द से कराह रहा था। स्टाफ आया और हमें हटाकर सब्जी का ठेला अंदर ले गया। पूछने पर बदतमीजी करने लगा।” लोगों का कहना है कि महंगे इलाज के नाम पर मोटी फीस वसूलने वाला अस्पताल अगर मरीज को लिफ्ट तक न दे पाए तो उसकी मानवता पर सवाल उठना लाजिमी है। शहर के सामाजिक संगठनों ने इस घटना की निंदा की है। मांग उठ रही है कि वायरल वीडियो की जांच कर दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई हो और अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया जाए। साथ ही यह भी तय हो कि मरीजों के लिए बनी सुविधाओं का उपयोग सिर्फ मरीजों के लिए ही हो।अमलतास अस्पताल प्रबंधन का इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सवाल यह है कि क्या इस बार भी रसूख के आगे इंसानियत हार जाएगी, या प्रशासन कोई सख्त कदम उठाएगा?

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